कांग्रेस को दी नीतियों पर मंथन करने की नसीहत....
संगरूर। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट को लेकर आश्वस्त पूर्व विधायक दलवीर सिंह गोल्डी की टिकट कटने का दर्द आज साफ दिखाई दिया। हालांकि, गोल्डी ने पार्टी के फैसले का स्वागत तो जरूर किया, लेकिन पार्टी पर गुस्सा जाहिर करते धोखे में रखने की बात भी कही।
यही नहीं, गोल्डी ने संसदीय सीट संगरूर के एक बड़े कांग्रेस नेता का नाम लिए बगैर आड़े हाथ लेते कहा कि कांग्रेस नेता ने ही उसे परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मसलन, बेशक गोल्डी ने अपना दर्द झलका दिया है, लेकिन कहीं गोल्डी का यह दर्द कांग्रेस के आंसू न निकाल दे। दलवीर गोल्डी ने अपना दुख जाहिर करते इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव होकर कांग्रेस को अपनी नीतियों पर मंथन करने की सलाह दी।
2017 में विधानसभा चुनाव में मारी थी बाजी
बता दें कि कांग्रेस ने संगरूर से सुखपाल सिंह खैहरा को टिकट दी है। गौर हो कि दलवीर सिंह गोल्डी साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से चुनाव में उतरे और विजयी हुए थे, लेकिन साल 2022 के चुनाव में धूरी से मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव में उतरे, तो हार गए थे।
साल 2022 के संसदीय उप चुनाव में कांग्रेस की तरफ से दलवीर सिंह गोल्डी को मैदान में उतारा गया, लेकिन वह अकाली दल (अ) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान से हार गए।
गोल्डी ने कहा कि वह साल 2012 के विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने टिकट अरविंद खन्ना को दे दी, जो अब भाजपा में हैं।
फिर साल 2014 के लोकसभा उपचुनाव में दावेदारी के बावजूद कांग्रेस ने टिकट सिमरप्रताप बरनाला को दे दी, जो आजकल अकाली दल में है। 2019 में वह संसदीय चुनावों की टिकट के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने टिकट केवल सिंह ढिल्लों को दे दी, जो अब भाजपा में है।
सुखपाल खेहरा का स्वागत करने की कही बात
इतना होने के बावजूद वह पार्टी के साथ खड़े हैं। बहरहाल, गोल्डी ने सुखपाल खेहरा का स्वागत करने की बात जरूर कही है, लेकिन गोल्डी के ऐसे शब्द कहीं न कहीं गोल्डी समर्थकों के लिए संदेश जरूर है कि उनके साथ अच्छा नहीं हुआ।
गोल्डी ने कहा कि वह पार्टी के वफादार सिपाही हैं। वह लालच में आकर औैर किसी दूसरी पार्टी में नहीं जाएंगे। यह पहला अवसर नहीं है, जब उनकी टिकट काट दी गई है। इससे पहले भी ऐसा होता रहा है।
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