छतरपुर में ग्रामीणों का विरोध, केन-बेतवा लिंक परियोजना पर उठे सवाल
छतरपुर| मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है. हालांकि इस परियोजना को लेकर लोगों का विरोध बढ़ता ही जा रहा है. मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर आदिवासी समुदाय के लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं. खासतौर पर पन्ना और छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध हो रहा है|
परियोजना का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि वे मुआवजा राशि से खुश नहीं हैं, इसमें कई तरह की विसंगतियां है. यही वजह है कि जिन लोगों की जमीन इस परियोजना में जा रही है, वह लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे हैं. पिछले दिनों उन्हें जेल भी भेजा गया था. हालांकि कुछ ही दिन बाद वे जमानत पर बाहर आ गए थे|
किस वजह से विरोध कर रहे ग्रामीण
केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध ग्रामीण पुनर्वास को लेकर कर रहे हैं. उनकी मांग है कि विकसित जो भी ग्राम हैं, उसमें उन्हें रहने के लिए जगह दी जाए. इसके साथ ही 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए. जबकि प्रशासन ग्रामीणों को केवल 12.50 लाख रुपये देना चाहता है. इसके साथ ही दूसरी जगह पर रहने के लिए जमीन देने को लेकर कोई प्लान नहीं है. इसी बात को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं|
केन-बेतवा लिंक परियोजना में छतरपुर जिले के 24 गांव विस्थापित हो रहे हैं, जबकि 08 गांव डूब क्षेत्र में हैं. इन गांवों में विरोध ज्यादा हो रहा है. जबकि पहले से ही 16 गांव टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल होने वाले हैं. लोगों का कहना है कि पहले ही जो गांव बचे थे. उन्हें ले लिया गया है. ऐसे में हम कहां रहने जाएंगे. लोगों की केवल एक ही मांग है कि उन्हें रहने के लिए विकसित गांव दे दिया जाए और 5 लाख रुपये दिए जाएं. ताकि वह अपनी जिंंदगी नए सिरे से शुरू कर सकें|
मासूमों के साथ चिता पर लेटीं महिलाएं
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ चिता आंदोलन देखने को मिल रहा है. प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी आदिवासी महिलाओं का प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारी महिलाएं मासूम बच्चों के साथ प्रतीकात्मक चिताओं पर लेट गई हैं. उनका आरोप है कि जिस जमीन और जंगल ने उन्हें पहले जीवन दिया, उसे छीनकर सरकार उन्हें जीते जी मार रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और वन विभाग ने सभी रास्तों पर पहरा लगा दिया है. प्रशासन ने पन्ना और छतरपुर के कुछ हिस्सों में धारा 163 लागू कर दी है|
क्या है केन-बेतवा-लिंक परियोजना?
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था कि देश की नदियां एक दूसरे से कनेक्ट हों. ताकि जो नदियां सूख जाती हैं. उनमें हमेशा पानी बना रहे और लोगों को मदद मिलती रहे. उनका यह सपना मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी भी दे दी है. इसके साथ ही जमीन का आवंटन भी किया जा चुका है. इस परियोजना में 44 हजार 605 करोड़ रुपये की है. इसी में 3700 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध छतरपुर जिले में बनाया जाएगा. इसके कारण कई गांव डूब रहे हैं. तो वहीं 3 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई भी पूरी होगी. हालांकि ग्रामीण अपनी कुछ मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं. प्रशासन की तरफ से भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा है|
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