पलक्कड़ में कांग्रेस की जीत, पिशारोडी के सिर सजा जीत का ताज
पलक्कड़। केरल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार पलक्कड़ में सस्पेंस से भरे मुकाबले के बाद कांग्रेस ने अपना परचम लहरा दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी रमेश पिशारोडी ने इस त्रिकोणीय संघर्ष में भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता शोभा सुरेंद्रन को 13,147 मतों के अंतर से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की। 9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद 4 मई को हुई मतगणना में पलक्कड़ का चुनावी रण अंतिम राउंड तक बेहद रोमांचक बना रहा, जहाँ अंततः पिशारोडी ने 62,199 वोट हासिल कर जीत का ताज अपने नाम किया।
उतार-चढ़ाव भरी मतगणना और पिशारोडी की वापसी
11 राउंड की लंबी मतगणना के दौरान पलक्कड़ सीट पर पल-पल समीकरण बदलते रहे। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी की शोभा सुरेंद्रन ने बढ़त बनाकर कांग्रेस खेमे में हलचल पैदा कर दी थी। सुबह 11:35 बजे तक शोभा सुरेंद्रन 2,728 वोटों से आगे चल रही थीं, लेकिन दोपहर होते-होते रमेश पिशारोडी ने अपनी लोकप्रियता और मजबूत पकड़ के दम पर वापसी की। छठे राउंड के बाद पिशारोडी ने जो बढ़त बनाई, वह अंतिम राउंड तक बढ़ती ही गई। दोपहर 3:40 बजे तक मतगणना पूरी होने पर कांग्रेस उम्मीदवार ने निर्णायक बढ़त के साथ भाजपा के इस मजबूत दुर्ग में अपनी जीत सुनिश्चित कर ली।
भाजपा की कड़ी चुनौती और एलडीएफ का खराब प्रदर्शन
भारतीय जनता पार्टी के लिए पलक्कड़ एक आधारभूत और मजबूत सीट मानी जाती रही है, जहाँ शोभा सुरेंद्रन ने 49,052 वोट हासिल कर कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, वह इस फासले को पाटने में असफल रहीं और दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं, दूसरी ओर वामपंथी गठबंधन (LDF) के लिए यह चुनाव निराशाजनक रहा। एलडीएफ समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार एन.एम.आर. रजाक के खाते में महज 33,931 वोट आए, जिससे यह मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट कर रह गया। रजाक की चुनावी विफलता ने कांग्रेस के लिए राह और आसान बना दी।
चुनावी समीकरण और पिशारोडी की लोकप्रियता का असर
पलक्कड़ की इस जीत के पीछे रमेश पिशारोडी की व्यक्तिगत छवि और कांग्रेस के रणनीतिक समीकरणों को मुख्य वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा का आधार मजबूत होने के बावजूद पिशारोडी मतदाताओं के बीच विश्वास जगाने में सफल रहे। इस जीत के साथ ही पलक्कड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। केरल की सभी 140 सीटों पर आए इन परिणामों ने राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय कर दी है, जिसमें पलक्कड़ का यह परिणाम कांग्रेस के लिए एक संजीवनी की तरह देखा जा रहा है।
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