जबलपुर: चोरों ने सबूत छोड़ दिए, पुलिस जुटाने में नाकाम
जबलपुर:गोराबाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कजरवारा इलाके में लगातार पैर पसार रही आपराधिक गतिविधियों और हाल ही में हुई एक बड़ी चोरी की वारदात ने स्थानीय नागरिकों की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय पांडेय ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कजरवारा पुरानी बस्ती में घटित हुई चोरी की इस गंभीर घटना को लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों को एक शिकायती पत्र प्रेषित किया है, जिसमें उन्होंने सुस्त पुलिसिया तंत्र को चुस्त करने और अपराधियों के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कदम उठाने की पुरजोर वकालत की है।
सूने मकान में चालाकी से अलमारी का लॉक खोलकर लाखों की चपत
कजरवारा पुरानी बस्ती के रिहायशी इलाके में रहने वाले कंधी लाल उपाध्याय के सूने पड़े मकान को शातिर चोरों ने अपना निशाना बनाया। वारदात के समय गृहस्वामी अपने पुत्र से मिलने बिलहरी गए हुए थे, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने घर के भीतर प्रवेश किया। चोरों ने किसी कटर या हथौड़े का इस्तेमाल करने के बजाय बड़ी ही चालाकी से दो गोदरेज अलमारियों के तालों की रॉड निकाली और लॉकर में रखे सोने की चेन, चार अंगूठियां, मंगलसूत्र, चार चूड़ियों सहित भारी मात्रा में नकदी पर हाथ साफ कर दिया। पीड़ित परिवार के अनुसार चोरी गए इन संपूर्ण सोने के आभूषणों और नकदी की कुल अनुमानित कीमत लगभग आठ से नौ लाख रुपये के आस-पास आंकी जा रही है।
घटनास्थल पर सबूतों की अनदेखी और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलने के बाद गोराबाजार थाने से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) मरावी ने अपनी टीम के साथ मौका मुआयना किया था और औपचारिकताएं निभाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों को भी बुलवाया था। हालांकि पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि शुरुआती कागजी कार्रवाई के बाद पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वारदात की जगह से चोरों के जूते बरामद हुए थे, जिन्हें जांच एजेंसी ने अब तक वैज्ञानिक परीक्षण के लिए अपने कब्जे में नहीं लिया है, जिससे डॉग स्क्वायड और आधुनिक खोजी प्रणाली की मदद न लेने के पुलिसिया रवैए पर जनता का आक्रोश भड़क उठा है।
जुआ, नशा और देर रात तक असामाजिक तत्वों का बढ़ता जमावड़ा
मानव अधिकार समिति के अध्यक्ष अजय पांडेय ने पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में क्षेत्र की अन्य समस्याओं को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है। उनका कहना है कि गोराबाजार और कजरवारा के मुख्य चौराहों और गलियों में इन दिनों जुए के फड़ सज रहे हैं और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। देर रात तक खुली रहने वाली दुकानों और सुनसान कोनों पर असामाजिक तत्वों का डेरा जमा रहता है, जिससे आम संभ्रांत नागरिकों और महिलाओं का रास्तों से गुजरना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्य मार्गों पर नियमित पुलिस गश्त (पेट्रोलिंग) न होने के कारण ही इन शातिर अपराधियों और मनचलों के हौसले आसमान छू रहे हैं।
पीड़ित परिवार द्वारा इनाम की घोषणा और त्वरित कार्रवाई का आग्रह
वारदात के कई दिन बीत जाने के बाद भी जब स्थानीय पुलिस के हाथ खाली रहे, तो पीड़ित मकान मालिक ने निराश होकर स्वयं एक बड़ा कदम उठाया है। कंधी लाल उपाध्याय ने घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति इन अज्ञात चोरों का सुराग देगा या उन्हें पकड़वाने में प्रशासन की मदद करेगा, उसे उनकी तरफ से दस हजार रुपये का नकद और गुप्त पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही मानवाधिकार संगठन ने पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि एक विशेष खोजी दल का गठन कर आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके और पीड़ित परिवार को उनका हक वापस मिल सके।
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