पैदल चलने वालों के लिए बनी जगह ही बंद, भोपाल में अव्यवस्था उजागर
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खराब इंजीनियरिंग और लचर प्लानिंग का एक और अजीबोगरीब नमूना सामने आया है। ऐशबाग के बहुचर्चित '90 डिग्री ब्रिज' के बाद अब वार्ड 32 में फुटपाथ पर ऐसी प्रशासनिक 'कारीगरी' दिखाई दी है, जिसने पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए बने फुटपाथ को एक बंद पिंजरे में तब्दील कर दिया है। शहर के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के नाम पर सड़क किनारे करीब 3 फीट ऊंची लोहे की मजबूत जाली (फेंसिंग) खड़ी कर दी गई है, जिससे आम जनता का फुटपाथ तक पहुंचना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है।
पार्षद निधि से कराए जा रहे इस काम को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यह फुटपाथ आम जनता के लिए पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहा है।
दोनों तरफ से बंद हुआ रास्ता, कट पॉइंट्स पर ठेलों का कब्जा
इस नए निर्माण के बाद धरातल पर स्थिति यह हो गई है कि फुटपाथ के एक तरफ पहले से ही 3 फीट ऊंची पक्की दीवार बनी हुई थी और अब दूसरी तरफ भी 3 फीट ऊंची लोहे की जाली ठोक दी गई है। इसके चलते फुटपाथ बीच में पूरी तरह लॉक हो गया है। राहगीरों के आने-जाने के लिए पूरी पट्टी पर गिने-चुने 'कट पॉइंट' (रास्ते) छोड़े गए थे, लेकिन उन पर भी स्थानीय ठेले वालों और अतिक्रमणकारियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धरातल की स्थिति और व्यावहारिक दिक्कतों को देखे बिना ऐसी दोषपूर्ण डिजाइन को कैसे मंजूरी मिल जाती है? यदि कोई बस या सार्वजनिक वाहन से सड़क पर उतरता है, तो वह चाहकर भी फुटपाथ पर नहीं चढ़ सकता।
पार्षद और अधिकारियों की सफाई; डिजाइन बदलने का दावा
इस मामले पर चौतरफा घिरने के बाद नगर निगम के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपनी सफाई पेश की है:
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ईई एनके डेहरिया (नगर निगम): उन्होंने बताया कि इस निर्माण को लेकर संबंधित इंजीनियर से विस्तृत जानकारी मांगी गई है कि यह काम किस मद से और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ था। यदि जनता को परेशानी हो रही है, तो इसमें तुरंत आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने गुरुवार को खुद मौके पर जाकर स्थिति का मुआयना करने की बात कही है।
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आरती अनेजा (स्थानीय पार्षद): उन्होंने इस अजीबोगरीब फेंसिंग के पीछे का तर्क देते हुए कहा कि इस फुटपाथ पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने भरोसा दिया था कि इससे पैदल यात्रियों को कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जब उन्होंने खुद जाकर जमीनी हकीकत देखी तो स्थिति बिल्कुल उल्ट थी। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस फेंसिंग की डिजाइन को बदलवाया जाएगा।
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