प्लंबर की मौत पर हंगामा, परिवार ने मुआवजे और पेंशन की मांग की
झज्जर। नूना माजरा के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सीवर की सफाई करते समय प्लंबर सुनील की हुई दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को मामला पूरी तरह गरमा गया है। मृतक के दुखी परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिसके चलते उन्होंने नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) से सुनील का शव उठाने से साफ मना कर दिया है। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन के रवैये के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है।
सुरक्षा उपकरणों की कमी का आरोप, पीड़ित परिवार के लिए मांगी पेंशन
अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों ने प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही है; सुनील को बिना किसी सुरक्षा किट और उपकरणों के जहरीले सीवर में उतारा गया था। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
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मुआवजा: मृतक के आश्रितों को तुरंत 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
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पारिवारिक पेंशन: सुनील की पत्नी के जीवन-यापन के लिए हर महीने स्थायी पेंशन का प्रबंध किया जाए।
मांगें पूरी न होने पर यूनिवर्सिटी गेट पर तालाबंदी का अल्टीमेटम
नागरिक अस्पताल में भारी तादाद में इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों पर अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और उग्र करेंगे। इसके तहत उन्होंने पास ही स्थित यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला जड़ने और पूरी तरह चक्का जाम करने की धमकी दी है।
रणनीति तय करने के लिए आज शाम 4 बजे बैठेगी महापंचायत
इस पूरे गतिरोध को सुलझाने और आंदोलन की आगे की दिशा तय करने के लिए ग्रामीणों ने आज शाम 4 बजे एक बड़ी पंचायत बुलाई है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि इस महापंचायत में जो भी सामूहिक निर्णय लिया जाएगा, उसी के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे। तब तक अस्पताल से शव नहीं लिया जाएगा।
प्रशासनिक अमला अलर्ट, शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश जारी
घटना के बाद से उपजे तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नागरिक अस्पताल और नूना माजरा के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस के आला अधिकारी ग्रामीणों को समझाने-बुझाने और अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, ताकि कानून-व्यवस्था नियंत्रण में रहे।
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