वर्क फ्रॉम होम को लेकर सियासी वार, प्रियंका चतुर्वेदी ने साधा निशाना
मुंबई: मध्य पूर्व के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई 'बचत' की अपील पर सियासी घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम के इस बयान पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) की सलाह को खुद नेताओं पर लागू करने की चुनौती दी है।
नेताओं की रैलियों और समारोहों पर लगे पाबंदी
प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री के सामने जनता की ओर से कुछ सुझाव रखते हुए कहा कि यदि त्याग की शुरुआत करनी है, तो इसकी पहल सरकार और राजनेताओं से होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मंत्रियों और नेताओं की लंबी चुनावी रैलियों पर एक साल के लिए पूर्ण पाबंदी लगाई जाए। साथ ही, भव्य शपथ ग्रहण समारोहों को बंद कर उन्हें 'WFH' यानी 'वॉच फ्रॉम होम' के जरिए संचालित किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी संसाधनों की बचत हो सके।
असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कसा तंज
यूबीटी नेता ने 12 मई को होने वाले असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र करते हुए केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि वे उम्मीद करती हैं कि असम के इस भव्य कार्यक्रम से ही 'वॉच फ्रॉम होम' की शुरुआत होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'वॉक द टॉक' (जो कहें वो करके दिखाएं) की नसीहत देते हुए कहा कि जनता को उपदेश देने से पहले नेताओं को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।
नीतियों की विफलता का बोझ जनता पर क्यों?
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष को संभालने में सरकार विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज देश आर्थिक दबाव में है और इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके अनुसार, नागरिकों से तेल बचाने या खरीदारी कम करने के लिए कहना अनुचित है, क्योंकि जनता पहले से ही महंगाई और चुनावी केंद्रित शासन की मार झेल रही है।
विदेशी दौरों और पुरस्कारों पर भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने सरकार की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार बटोरने में व्यस्त रही और वास्तविक संकटों के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई। अब जब परिस्थितियां कठिन हो गई हैं, तो सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय आम आदमी से यात्राएं और खर्च कम करने की अपील कर रही है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
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