Priyanka Chaturvedi का बड़ा बयान, INDIA गठबंधन पर जताई निराशा
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी खेमे के भीतर पनप रहे विरोधाभासों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान किया है। उन्होंने गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के व्यवहार पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे महत्वपूर्ण दलों की चुनावी हार पर जश्न मनाना या अहंकार प्रदर्शित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका के अनुसार, इस प्रकार की आंतरिक खींचतान न केवल गठबंधन की छवि को धूमिल करती है बल्कि विपक्षी एकता की नींव को भी कमजोर करने का काम करती है।
विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती दूरियां और पुराने उदाहरण
प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी एकता के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सहयोगियों ने एक-दूसरे की हार पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव की चुनावी असफलताओं के दौरान भी कुछ विपक्षी दलों का रवैया ऐसा ही उपेक्षापूर्ण रहा था। उन्होंने हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर चले अंतर्विरोधों का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि यदि सहयोगी दल एक-दूसरे का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तो गठबंधन का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उनका मानना है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को देखते हुए अखिलेश यादव को जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, वह विपक्षी एकता के लिए एक खतरनाक संकेत है।
आंतरिक कलह से सत्तापक्ष को मिलने वाली बढ़त
विपक्षी रणनीतियों का विश्लेषण करते हुए शिवसेना नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडिया गठबंधन के भीतर उठने वाले इन मतभेदों का सीधा और सबसे बड़ा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलता है। जब जनता विपक्ष को बिखरा हुआ और आपस में ही लड़ता हुआ देखती है, तो मतदाताओं का विश्वास डगमगाने लगता है, जिसके कारण मजबूत विकल्प होने के बावजूद विपक्ष पिछड़ जाता है। प्रियंका का कहना है कि गठबंधन की शक्ति किसी एक व्यक्ति या विशेष दल के वर्चस्व में नहीं, बल्कि सभी दलों के साझा संघर्ष में निहित है। उन्होंने आगाह किया कि अगर आपसी बयानबाजी और अहंकार को नियंत्रित नहीं किया गया, तो चुनावी मैदान में सत्ताधारी दल को चुनौती देना और भी कठिन हो जाएगा।
गठबंधन के मूल उद्देश्यों को याद रखने की अपील
प्रियंका चतुर्वेदी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव के दौर की याद दिलाते हुए सभी सहयोगी दलों से यह आत्ममंथन करने की अपील की है कि आखिर इस बड़े गठबंधन का निर्माण किन लक्ष्यों के साथ किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन की ताकत सामूहिक प्रयासों से बनी थी और इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी भी साझा है। उन्होंने विपक्षी दलों को अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और मतभेदों को हाशिए पर रखकर एकजुट होने की सलाह दी ताकि एक सशक्त विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश आया जा सके। प्रियंका के मुताबिक, केवल सामूहिक एकता के बल पर ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है और वर्तमान सत्ता के एकाधिकार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
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