राहुल गांधी का नया दांव: क्या गुजरात में बदल पाएगी कांग्रेस की किस्मत?
गुजरात — वो राज्य जहां बीजेपी की पकड़ पिछले दो दशकों से इतनी मज़बूत रही है कि कांग्रेस लगभग हाशिए पर चली गई। लेकिन अब राहुल गांधी एक नए मिशन पर हैं, और इस बार रणनीति भी बदली हुई है।
पहली बार — जिलाध्यक्षों का चुनाव पर्यवेक्षकों के ज़रिए
कांग्रेस ने संगठन में नीचे से ऊपर तक बदलाव की शुरुआत की है। अब जिलाध्यक्षों का चयन ऊपर से नहीं थोपे जाएंगे, बल्कि हर जिले में नियुक्त पर्यवेक्षक स्थानीय कार्यकर्ताओं से राय लेकर फैसले करेंगे।
इसका मतलब:
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कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ेगी
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फैसलों में पारदर्शिता आएगी
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गुटबाज़ी और ऊपर से थोपे गए नेताओं पर लगाम लगेगी
राहुल गांधी का असल मक़सद क्या है?
राहुल जानते हैं कि अगर गुजरात जैसे राज्य में कांग्रेस को फिर से खड़ा करना है, तो सिर्फ चुनावी भाषणों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मज़बूत संगठन के बिना कुछ नहीं होगा।
ये मॉडल अगर सफल हुआ, तो यह कांग्रेस के दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है — एक bottom-up नेतृत्व शैली, जो पार्टी को अंदर से ताक़तवर बना सके।
लेकिन क्या इससे कांग्रेस की किस्मत बदलेगी?
अब यही बड़ा सवाल है। गुजरात में बदलाव की हवा तभी बनेगी अगर ये "नया तरीका" वाकई जमीन पर असर दिखाए — और इसके लिए ज़रूरी है कि चुने गए नेता न केवल लोकप्रिय हों, बल्कि एक्शन में भी दमदार हों।
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