रिंकू सिंह के पिता ने गरीबी के बावजूद बेटे के सपने पूरे किए
अलीगढ़। क्रिकेट की दुनिया में प्रशंसक आज जिस फिनिशर रिंकू सिंह के छक्कों पर झूमती है, उनको इस मुकाम तक पहुंचाने वाले रिंकू सिंह के पिता का एक सपना अधूरा रह गया। हर पिता की तरह खानचंद की आंखों में भी एक सपना था कि जिस बेटे रिंकू सिंह ने दुनिया जीती है, उसे सेहरा बांधे देख सकें। नियति का खेल देखिए उसकी शादी का सपना सीने में दबाए ही पिता विदा हो गए। यह कसक आज रिंकू और उनके पूरे परिवार को अंदर तक छलनी कर रही है। रिंकू सिंह की शादी टी-20 विश्व कप के बाद मछली शहर की सांसद प्रिया सरोज से होनी है। प्रिया सरोज के साथ उनकी मंगनी हो चुकी है। अलीगढ़ की तंग गलियों में साइकिल पर भारी गैस सिलिंडर लादकर घर-घर पहुंचाने वाले खानचंद का शुक्रवार को निधन हो गया। वे अपने पीछे सफलता की एक ऐसी इबारत छोड़ गए हैं, जो केवल पसीने और एक पिता के अडिग विश्वास से लिखी गई थी। उन्होंने गरीबी के बोझ के नीचे दबकर भी बेटे के अरमानों को झुकने नहीं दिया। दो कमरों के मामूली मकान में रहने वाले खानचंद दिन भर सिलिंडर ढोकर जो चंद रुपये कमाते, उनसे वे रिंकू के लिए गेंद और बल्ले का इंतजाम करते थे।
रिंकू ने फटे जूतों और तंगहाली के बीच तय किया नीली जर्सी तक का सफर
कोच मसूद जफर अमीनी भावुक होकर याद करते हैं कि कैसे खानचंद खुद रिंकू का हाथ थामकर अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम लाए थे। वह पिता का ही हौसला था कि रिंकू ने फटे जूतों और तंगहाली के बीच अंडर-16 से लेकर टीम इंडिया की नीली जर्सी तक का सफर तय किया। एक दौर वह भी था जब रिंकू खुद पिता का हाथ बंटाने के लिए कभी-कभार बाइक पर सिलिंडर पहुंचा देते थे, लेकिन खानचंद ने हमेशा कोशिश की कि रिंकू का ध्यान खेल से न भटके। उन्होंने ताउम्र मेहनत की ताकि उनका बेटा सिर्फ मैदान पर पसीना बहाए। रिंकू के कामयाब होने के बाद भी खानचंद का संघर्ष के प्रति सम्मान कम नहीं हुआ।
मजदूरी से बेटे को दिलाई प्रसिद्धि
आज अलीगढ़ की उन गलियों में एक अजीब सा सन्नाटा है। रिंकू सिंह ने जब अपने पिता की अर्थी को कांधा दिया, तो मानो एक युग का अंत हो गया। एक ऐसा युग जहां एक पिता ने अपनी मजदूरी को बेटे की प्रसिद्धि का जरिया बना दिया।
बेसुध होकर गिरी मां
पिता के जाने की खबर जब ओजोन सिटी स्थित आवास पर पहुंची, तो वहां का मंजर कलेजा चीर देने वाला था। ग्रेटर नोएडा के अस्पताल से घर लाते समय तक मां बीना को यह बताया गया था कि डॉक्टर ने उन्हें घर ले जाने को कहा है, लेकिन जैसे ही घर की चौखट पर सच सामने आया, मां बेसुध होकर गिर पड़ीं। बहन नेहा और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे परिवार को ढांढस बंधाने के बाद रिंकू ने भारी मन से लेकिन मजबूत इरादे के साथ देश के लिए खेलने का संकल्प लिया है।
लीवर कैंसर के स्टेज-4 से थे पीड़ित, दी जा रही थी रिप्लेसमेंट थेरेपी
रिंकू सिंह के पिता खानचंद को मंगलवार को यहां यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी। खानचंद लीवर कैंसर के स्टेज-4 से पीड़ित थे। रिंकू के भाई सोनू अस्पताल में मौजूद रहे और पिता की देखरेख करते रहे। पिता की तबीयत बिगड़ने पर मंगलवार को रिंकू भी उनसे मिलने आए थे। जानकारी के अनुसार, शुरुआत में पिता बेटे के क्रिकेट के खेलने के खिलाफ थे लेकिन एक बार रिंकू को मैच में इनाम के तौर पर बाइक मिली थी। उसके बाद आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने रिंकू को क्रिकेटर बनने के लिए हर संभव सहयोग किया है। बीते वर्ष रिंकू ने अपने पिता को 3.19 लाख रुपये की कावासाकी निंजा बाइक उपहार में दी थी।
नहीं रहे रिंकू सिंह के पिता खानचंद
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 60 वर्षीय खानचंद लंबे समय से चौथी स्टेज के लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में सुबह 4:30 बजे अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से सुबह 10 बजे अलीगढ़ में ओजोन सिटी स्थित गोल्डन एस्टेट स्थित उनके आवास पर पहुंचा। रिंकू सिंह के पिता के निधन की सूचना पाकर उनके आवास पर भीड़ लग गई।
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