शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट अमावस्या एक साथ
मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ऐतिहासिक और त्रेतायुगीन शनि मंदिर में शनिवार को श्रद्धा और विश्वास का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। पूरे 32 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट सावित्री अमावस्या का एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र त्रिवेणी संयोग बनने के कारण देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु न्याय के देवता शनि देव के दरबार में मत्था टेकने पहुंचे। आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप जैसी भीषण गर्मी भी भक्तों के बढ़ते कदमों को नहीं रोक सकी। शनि पर्वत की चढ़ाई करने के लिए श्रद्धालु तपती सड़क पर करीब 2 किलोमीटर की दूरी नंगे पांव तय करते नजर आए।
छाले न पड़ें इसलिए पैरों में पॉलीथिन बांधकर पहुंचे श्रद्धालु
कड़कती धूप के कारण खौलती जमीन और पत्थरों से तलवों को बचाने के लिए भक्तों ने अनोखा तरीका अपनाया; कई श्रद्धालु पैरों में पानी डालकर ऊपर से पॉलीथिन बांधकर यात्रा पूरी करते दिखे। मंदिर प्रांगण और पूरे शनि पर्वत पर तड़के से ही दर्शनार्थियों की मीलों लंबी लाइनें लग गईं। स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक ही लगभग 2 लाख लोग शनि देव की चौखट पर शीश नवा चुके थे, जबकि देर रात तक यह आंकड़ा 10 लाख के पार जाने की उम्मीद जताई गई।
रामायण काल से जुड़ा है इस पावन स्थल का इतिहास
धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंदिर के मुख्य महंत त्यागी जी महाराज ने बताया कि यह देवस्थान त्रेतायुग कालीन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब रामभक्त हनुमान जी ने लंका दहन किया था, तब उन्होंने रावण के चंगुल से शनि देव को आजाद कराया था। मुक्ति के बाद पवनपुत्र ने शनि महाराज को इसी पावन शनि पर्वत पर प्रतिष्ठित किया था। महंत जी ने एक और दिलचस्प तथ्य साझा करते हुए बताया कि सिंगापुर और पुर्तगाल जैसे सुदूर देशों में जिन भव्य शनि प्रतिमाओं की स्थापना की गई है, उनके निर्माण के लिए पाषाण (पत्थर) इसी पौराणिक शनि पर्वत से मंगाए गए थे।
शनि दोष और महादशा से मिलती है मुक्ति, प्रशासन के पुख्ता इंतजाम
भक्तों में यह अटूट विश्वास है कि इस प्राचीन पीठ पर आकर तैलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती और महादशा के समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इसी आस्था के वशीभूत होकर मध्य प्रदेश के अलावा करीब 10 पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालु यहां खिंचे चले आए।
इस विशाल जनसमूह की सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए हैं। कानून व्यवस्था, चिकित्सा और नागरिक सुविधाओं को सुचारू रखने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के लगभग 1400 अधिकारी व कर्मचारी मुस्तैदी से मेले में तैनात रहे। इसके अलावा, पारंपरिक मुंडन संस्कार की रस्म को बिना किसी असुविधा के संपन्न कराने के लिए प्रशासन की तरफ से विशेष रूप से 500 नाइयों (हज्जामों) की सामूहिक व्यवस्था की गई।
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