रोहित पवार ने राज ठाकरे के बयान पर जताई आपत्ति, गंगा नदी के प्रदूषण पर किया शोध
रोहित पवार: महाराष्ट्र में एनसीपी-एससीपी विधायक रोहित पवार ने राज ठाकरे के नदी के प्रदूषित होने वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि धार्मिकता बहुत जरूरी है. मैं महाकुंभ में गया था, पवित्र डुबकी लगाई. उन्होंने कहा कि महाकुंभ से मैं हजारों लीटर जल अपने लोगों के लिए लाया था. वहां पर जाने के बाद जाने के बाद मुझे ताकत और प्रेरणा भी मिली, लेकिन राजनीति में होने के कारण हम थोड़ी पढ़ाई और रिसर्च की भी जानकारी रखते हैं.
रिसर्च में पता चला कि गंगा नदी की सफाई के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं. लेकिन वहां जाने के बाद जब हमने पानी का प्रदूषण स्तर देखा, तो निश्चित रूप से यह ज्यादा था. ऐसे में राज ठाकरे जी वहां के प्रदूषण की बात कर रहे हैं. क्योंकि मैं हजारों लीटर पानी वहां से लेकर आया मुझे उसे साफ करना पड़ा, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए. सभी नेताओं को इस बारे में सोच-समझकर बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उस जल में इतनी ताकत है कि उसमें से हमने प्रदूषण के कण निकाले फिर भी उसकी ताकत किसी भी तरीके से कम नहीं होती है. प्रदूषण को कम करने के बाद मैंने उसे अपने पहचान के लोगों के बीच बांट दिया.
प्रदूषण से गंगा की शक्ति कम नहीं हो जाती
गंगा में प्रदूषण काफी ज्यादा था, क्योंकि इसकी वजह से उसके पानी का कलर भी चेंज हो गया था. उन्होंने कहा कि कई बार गंगाजल को घर में मौजूद कुछ लोग पीते हैं और बच्चों को भी इससे स्नान कराया जाता है, ऐसे में किसी तरह की दिक्कत न हो इसलिए मैंने उसे फिल्टर कराया था. इसके इतर गंगा जी की शक्ति विचारों और पानी में है. जय भवानी और जय श्री राम जय हनुमान जी, जय मराठा ये तो हम सभी के विचार हैं. किसी पार्टी ने एक नारा दे दिया, किसी दूसरी पार्टी ने दूसरा नारा दे दिया, लेकिन ये सब तो हमारे ही विचार हैं, इसपर किसी का कोई अधिकार नहीं है. अब इसमें देखने वाली बात है कि आप नारे के पीछे धार्मिकता लेकर जा रहे हो या फिर धर्मांधता. बीजेपी जिस तरह की राजनीति करती है वो निश्चित तौर पर धर्मांधता की ओर आगे बढ़ रही है.
राज ठाकरे ने महाकुंभ में गंगा के पानी को लेकर बयान दिया था कि वो इतनी प्रदूषित है कि मैं कभी ये पानी नहीं छुऊंगा. देश में कोई भी नदी साफ नहीं है.
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