फरीदाबाद के किसान तेजपाल को गेंदे की खेती में लाखों का नुकसान, 18 सालों से कर रहे थे खेती
फरीदाबाद के नवादा गांव में रहने वाले किसान तेजपाल इस बार गेंदे की खेती से नाखुश हैं. वे पिछले 18 सालों से खेती कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के एतबारपुर के मूल निवासी हैं. उन्होंने नवादा गांव में डेढ़ किला जमीन पट्टे पर लेकर गेंदे के फूलों की खेती की है. खेती का पूरा खर्चा खुद उठाते हैं और इसी से अपने परिवार का गुजारा करते हैं, लेकिन इस बार उन्हें उतना मुनाफा नहीं हो रहा जितनी उम्मीद थी.
तेजपाल बताते हैं कि सबसे पहले खेत की जुताई करनी पड़ती है, फिर खाद डालनी होती है. लेकिन खाद आसानी से नहीं मिलती. कई बार उन्हें ब्लैक में महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि वे पट्टे पर खेती कर रहे हैं और जमीन के मालिक को सालाना 40 हजार रुपये प्रति किला देना पड़ता है.
फूलों के दाम नहीं मिलने से परेशान किसान
तेजपाल का कहना है कि इस बार मंडी में गेंदे के फूल का दाम बहुत कम रहा. वे अपने फूल दिल्ली की गाजीपुर मंडी और छतरपुर मंडी लेकर जाते हैं. वहां फूल 10 से 15 रुपये किलो में बिक रहे हैं, जबकि उन्हें कम से कम 30 से 35 रुपये किलो मिलना चाहिए, तभी कुछ मुनाफा होगा.
खेती में मेहनत और खर्चा दोनों ज्यादा है. मजदूरों की दिहाड़ी भी महंगी है. फूल तोड़ने के लिए मजदूर लगानी पड़ती हैं, जो एक दिन में करीब 30 किलो फूल तोड़ती हैं और 400 रुपये दिहाड़ी लेती हैं. इस तरह मजदूरी, खाद और पट्टे का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है.
तेजपाल कहते हैं कि खेती करना अब पहले जैसा फायदेमंद नहीं रहा, जितना खर्चा लगा रहे हैं. उतना मुनाफा नहीं मिल रहा. उन्होंने सरकार से मांग की है कि खाद की उपलब्धता सही की जाए और फूलों के उचित दाम मिलें ताकि किसानों को खेती में नुकसान न उठाना पड़े.
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