मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी गिरफ्तारी पर राहत नहीं, राजनीतिक हलचल बढ़ी
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी और रिमांड के विरुद्ध दायर याचिका पर फिलहाल कोई राहत नहीं मिल सकी है। मंत्री ने अपनी दलीलों में राजनीतिक द्वेष का हवाला देते हुए अन्य जनप्रतिनिधियों के समान संरक्षण की गुहार लगाई थी, परंतु अदालत ने उनकी रिहाई या गिरफ्तारी को अवैध ठहराने की मांग पर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। इसके अतिरिक्त, अदालत ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर जवाब देने में ढिलाई बरतने को लेकर पंजाब सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है।
संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी की वैधानिकता पर उठे सवाल
संजीव अरोड़ा ने अपनी कानूनी याचिका में 9 मई को हुई गिरफ्तारी को पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर और असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने पीएमएलए अदालत द्वारा 16 मई तक दी गई रिमांड को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ईडी की यह कार्रवाई पूरी तरह से पूर्वनियोजित थी और इसमें कानून द्वारा स्थापित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गिरफ्तारी के समय उन्हें इसके ठोस आधारों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
व्यापारिक विस्तार और सार्वजनिक पद की दलील
अरोड़ा ने अपनी प्रतिरक्षा में स्पष्ट किया कि वे हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के प्रमोटर जरूर रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक उत्तरदायित्व संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया था। उनके अनुसार, कंपनी द्वारा वर्ष 2023-24 में शुरू किया गया मोबाइल फोन निर्यात का व्यवसाय एक वैध व्यापारिक विस्तार था और इसमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। उन्होंने अदालत को विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि उनका इस कथित धन शोधन मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।
हरभजन सिंह की सुरक्षा पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर पंजाब सरकार के ढुलमुल रवैये पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे खारिज कर दिया और केवल एक सप्ताह की मोहलत दी है। न्यायाधीशों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले में जवाबदेही से बच रही है और अब इस मामले में और अधिक देरी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उग्र भीड़ का हमला और परिवार की सुरक्षा का संकट
सांसद हरभजन सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए अदालत को बताया कि सुरक्षा हटाए जाने के बाद से उनके और उनके परिवार के ऊपर खतरों का साया मंडरा रहा है। उन्होंने हाल ही में घटी एक अप्रिय घटना का विवरण देते हुए कहा कि एक हिंसक भीड़ ने उनके निवास स्थान के बाहर हंगामा किया और उनके घर की दीवारों पर आपत्तिजनक शब्द लिख दिए। इसे उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक सुरक्षा बल्कि अपने परिवार की मानसिक शांति और सम्मान पर भी एक बड़ा हमला बताया है, जिस पर अदालत ने सरकार को 20 मई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।
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